आख़िर क्या ऐसी नौबत आ पड़ी की हमारे गन्ना किसानों को संसद का घेराव करना पड़ा ये तो सब सोंच रहे होंगे। खास तौर से वे लोग जो डेल्ही की सड़कों पर कहीं न कहीं जाम में फंसे होंगे। कुछ लोग तो ये कहते दिखे कि किसानों को कोपी काम तो है नहींचले आयें हमारा काम ख़राब करने। इन्हें क्या पता कि ऑफिस लेट पहुंचे तो बॉस कि कितनी गलियां सुनने को मिलेंगी । और ये मीडिया वालों ने तो इनको सर पर चढाने के लिया है । इन्हे भी कोई काम धाम नहीं है ।
पर इन लोगों को क्या पता कि हमारे देश के गन्ना किसान अपनी फसल कि पूरी रकम कि मांग कर रहे हैं । सरकार ने जो गन्ने कि रकम निर्धारित कि है उससे हमारे किसान भाई खुश नहीं हैं। इसलिए गन्ने का निर्धारित मूल्य बढ़ने की मांग कर रहे है। पर हमें तो सिर्फ़ अपने से ही मतलब है । हम इन किसानों के बारे में क्यों सोंचे। देश में चीनी का दाम बढ़ रहा है ये बात तो सबको मालूम है मगर वो ये नहीं जानते की हम चीनी का आयत कर रहे हैं। इसी बात से हमारे किसान आहत हैं । और वे चीनी के आयात का विरोध कर रहे हैं। और गन्ने के मूल्य बढ़ने की भी मांग कर रहे हैं । पर हमें इसकी परवाह है ही नहीं । और कुछ जाने बिना हम किसानों को कोस रहे हैं, बजे इसके की हम भी सरकार से इसका जवाब मांगे । पर हम है तो अपने स्वार्थ में चूर हैं हमें औरों से क्या ?
LAU EK CHINGARI